Description
“””मैं लौट के नहीं आऊँगा””
एक ऐसी कहानी, जो अकेलेपन की खामोशी में गूंजती है।
राहुल की यात्रा सिर्फ़ एक लड़के की कहानी नहीं है- यह उन सभी आत्माओं की कहानी है जो टूटकर भी खुद को जोड़ते हैं, जो चुप रहकर भी भीतर की आवाज़ सुनते हैं, और जो जानते हैं कि अकेलापन कोई कमी नहीं, बल्कि एक रास्ता है खुद तक पहुँचने का।
इस उपन्यास में आपको मिलेंगे-
अधूरे सपनों की कसक
– रिश्तों की गर्माहट और दूरी
– शब्दों की रोशनी और चुप्पियों की गहराई
-और एक ऐसा सफर, जो बाहर नहीं भीतर की ओर जाता है।
अगर आपने कभी खुद को खोया है, या खुद को पाने की कोशिश की है, तो यह किताब आपके लिए है।
राहुल पाल की कलम से निकली यह कहानी आपको खुद से मिलवाने का निमंत्रण है।”





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